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Educational Programme
हर संस्कृति, हर सभ्यता का अपनी भाषा के साथ गहरा सम्बन्ध होता है। भाषा के शब्द विन्यास का प्राचुर्य और उसकी व्याकरण की प्रबुद्धता एक संस्कृति की उपलब्धियों का मापक है और इन उपलब्धियों को लिपिबद्ध करने का ज़रिया भी है। साथ ही साथ यह एक संभावनाओं का समुद्र है जिससे विभिन्न क्षेत्रों में सर्जन करने के असीमित संयोग उत्पन्न होते हैं। तो फिर यह समझना अत्यंत सरल है कि जिस समाज के पास ‘संस्कृत’ जैसी भाषा है उसकी संस्कृति निश्चित रूप से समृद्ध होगी और परंपरागत विरासत अत्यंत उच्च श्रेणी की होगी। संस्कृत भाषा के साहित्य की प्रकांड गहराई सदियों से बुद्धिजीवियों को आकर्षित करती आई है और जितना हम इसके विषय में जानते चले जाते हैं उतनी ही इसके प्रति हमारी उत्कंठा बढ़ती जाती है। अतः संस्कृत भाषा को बढ़ावा देना हमारे समय में अत्यावश्यक है; इस भाषा का संरक्षण ही भारत का संरक्षण है। यही कारण है कि ‘एकलब्य संस्कृत अकादमी’ ने संस्कृत के ज्ञान को जन जन तक पहुँचाने का बीड़ा उठाया है और इसके अंतर्गत प्रत्येक आयु वर्ग के लिए सरल पाठ्यक्रम तैयार किये गए हैं जिनका शुल्क वहन करना किसी के लिए भी मुश्किल नहीं है। ‘एकलव्य संस्कृत अकादमी’, संस्कृत भाषा के प्रसार के लिए स्थापित की गयी एक गैर-लाभ संस्था है और यहाँ निम्नलिखित कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं।
A culture is very closely linked with its language. A well articulated language is the measure of the depth of thought and creation a culture has accomplished, a record of these achievements and at the same time it is an ocean of opportunity for innumerable more acts of innovation taking place in multiple fields of human endeavor. When a society has a language as powerful as SANSKRIT there is no doubt that its culture is rich and its heritage awe-inspiring. The profound depths of Sanskrit literature have fascinated intellectuals for centuries and the more we delve into them, the more we feel the need to go further, know more. To spread the usage of this language is the need of the hour as Sanskrit is the heart of Indian culture and its preservation would mean the preservation of India. Eklavya Sanskrit Academy has therefore taken the responsibility of bringing the Sanskrit language to individuals of all age groups and across various fields through simple and easy programs which are very affordable for all strata of society. Eklavya Sanskrit Academy is a non-profit organization for Sanskrit Prachar, the spread of Sanskrit and given below is the list of programs and activities that we conduct.
1. Sanskrit Bhasha Shikshanam
Sanskrit Bhasha Shikshanam – The academy has a very well-designed curriculum for teaching Sanskrit in the way we learn any modern day language; the students are taught to speak it in their day to day life and read stories and other simple texts to become familiar with its grammar and vocabulary. This is how a child picks up any language so this is the right way in which a language should be taught to any age-group of people. Individuals from many walks of life attend these courses, the schedules and timings of which are decided keeping in mind the professional commitments of the attendees.
संस्कृतभाषाशिक्षणम् – अकादमी का संस्कृत शिक्षण का पाठ्यक्रम ठीक उसी तरह निर्धारित किया गया है जिस तरह प्राकृतिक रूप से हम कोई भी भाषा सीखते हैं। कहने का तात्पर्य ये है कि विद्यार्थी सबसे पहले इस भाषा को दिन प्रति दिन के सन्दर्भों में बोलना सीखते हैं और कहानियों एवं सरल गद्य की मदद से शब्दों और व्याकरण का ज्ञान अर्जित करते हैं। कोई भी बालक भाषा को पहले बोलना ही सीखता है और यही सही प्रणाली है जिससे भाषा का ज्ञान किसी भी आयु के संस्कृत सीखने के इच्छुक को दिया जाना चाहिए। कार्यक्रम के समय का निर्धारण इस बात को ध्यान में रखकर किया गया है कि विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत व्यक्ति कक्षा वगों में सरलता से पहुँच सकें।
2. Diploma in Sanskrit Teaching
Diploma in Sanskrit Teaching – This program aims to train individuals who wish to formally teach Sanskrit and has been evolved in response to the growing need of good Sanskrit teachers in today’s times. The curriculum ensures that candidates acquire proficiency in the language, confidence to face a class of students, right methods of designing a pedagogy, the skill to create relevant teaching-learning materials and finally the will to spread Sanskrit and to understand this to be a cardinal duty.
Diploma in Sanskrit Teaching: This program aims to train individuals who wish to formally teach Sanskrit and has been evolved in response to the growing need of good Sanskrit teachers in today’s times. The curriculum ensures that candidates acquire proficiency in the language, confidence to face a class of students, right methods of designing a pedagogy, the skill to create relevant teaching-learning materials and finally the will to spread Sanskrit and to understand this to be a cardinal duty.
3. Bal Sanskrit Kendram (Value Education through Sanskrit)
बालसंस्कृतकेन्द्रम् – इस कार्यक्रम को ‘वैल्यू एजुकेशन थ्रू संस्कृत’ नाम से भी जाना जाता है और ये सीनियर के. जी. से लेकर कक्षा चार तक के विद्यार्थियों के लिए ही है। यहाँ बालगीत, कविता, खेल इत्यादि के माध्यम से श्रुत परम्परा के अंतर्गत संस्कृत का ज्ञान दिया जाता है। कई गतिविधियाँ कक्षा के बाहर प्राकृतिक वातावरण में भी संचालित की जाती हैं। बच्चे, वयस्कों की तुलना में ज्यादा तेज़ी से सीखते हैं और इस उम्र में अर्जित ज्ञान आने वाली आयु के लिए एक पुष्ट नींव का निर्माण करता है।
4. Bal Sanskrit Vargah
बालसंस्कृतवर्गः – ये वर्ग खास तौर पर कक्षा पांच से लेकर कक्षा आठ तक के विद्यार्थियों के लिये तैयार किया गया है। अकादमी का ऐसा विश्वास है कि सतत प्रयास के माध्यम से हमारे समय में बालकों को ट्युशन क्लास पर निर्भरता से मुक्त कराने की आवश्यकता है। हम किसी भी विद्यालय के पाठ्यक्रम को लेकर नहीं चलते अपितु हमारे वर्ग की सहायता से बालक का मूल ज्ञान विकसित होता है और अंततः विद्यालय की परीक्षा में भी उसका नतीजा साफ दिखता है। संस्कृत सीखने से मातृ भाषा पर भी प्रभुत्व प्राप्त होता है।
5. Sanskrit Grammar Support Class
संस्कृत व्याकरण वर्ग – कक्षा नौ और दस के विद्यार्थीयों के लिए व्याकरण का ज्ञान अनिवार्य है और इसके लिए उन्हें सहायता की आवश्यकता महसूस होती है। हमारे वर्ग से न सिर्फ मूल सिद्धांतों पर उनकी पकड़ मजबूत होती है बल्कि ट्युशन क्लास की अपेक्षा उनमें अधिक आत्मविश्वास विकसित होता है क्योंकि यहाँ मात्र परीक्षा को केंद्र में रखकर शिक्षण नहीं दिया जाता। ये ज्ञान आजीवन उनके मस्तिष्क में प्रकाशमान रहता है।
6. Stotra Path
स्तोत्रपाठः – भारत में शिक्षण प्राप्त करते हुए हम सभी का संस्कृत श्लोक पाठ और स्तोत्र पाठ के साथ साक्षात्कार होता ही है परन्तु हमें यह महसूस होता है कि छन्द का हमारा ज्ञान पुष्ट नहीं है और लय और ताल पर भी पकड़ बहुत मज़बूत नहीं है। एकलव्य संस्कृत अकादमी में स्तोत्र उच्चारण एवं गायन की उचित पद्धति, उसका अर्थ तो सिखाया ही जाता है और साथ ही साथ उसकी दर्शन से संबंधित विषय वस्तु पर भी चर्चा की जाती है।
7. The Taste Of Sanskrit Literature
संस्कृत साहित्य का आस्वादन अकादमी के परिसर में समय समय पर ऐसे सत्र आयोजित किये जाते हैं जिनमें अपने विषय में पारंगत विद्वान् संस्कृत साहित्य के किसी गद्य, पद्य अथवा दार्शनिक लेखन पर व्याख्यान देते हैं। साहित्य में निहित रस को वो श्रोताओं तक पहुंचाते हैं और श्रोता इस प्रकार से संस्कृत भाषा के सौन्दर्य को महसूस कर आनंदित होते हैं। कई सत्रों में एक ग्रन्थ को चुनकर उसका पूर्ण अध्ययन भी कराया जाता है।
8. Sanskrit 'Sampratam'
संस्कृतसाम्प्रतम् ‘साम्प्रतम्’ मासिकी संस्कृत पत्रिका है जिसे अकादमी द्वारा प्रकाशित किया जाता है और इसमें चर्चित विषयों, साहित्य, सामाजिक मूल्यों आदि को लेकर लेख होते हैं; संस्कृत चुटकुले और कहानियां भी छापी जाती हैं। इसके पीछे का मूल उद्देश्य है कि संस्कृत अध्येताओं को प्रतिमाह संस्कृत में पढ़ने के लिए एक पत्रिका सुलभ रूप से प्राप्त हो। किसी भी भाषा के प्रचार में पत्रिका का अत्यंत महत्त्वपूर्ण योगदान होता है और इस पत्रिका को प्रकाशित एवं वितरित करने में अकादमी को बेहद गर्व महसूस होता है।
9. Sanskrit Prachaar Vyakhyan
संस्कृत प्रचार व्याख्यान, अकादमिक व्याख्यान उस सामाजिक श्रेणी के व्यक्तियों के लिए हैं जिनतक खेल और मनोरंजन की मदद से एवं कक्षा सत्रों में सिखाई जाने वाली संस्कृत भाषा के माध्यम से नहीं पहुंचा जा सकता। उनके लिए प्रचार व्याख्यान रखकर उन्हें पूरी गंभीरता के साथ अवगत कराया जाता है कि संस्कृत का प्रचार कितना महत्त्वपूर्ण है।
10. Publications
प्रकाशन एकलव्य संस्कृत अकादमीअब तक तीन पुस्तकें प्रकाशित कर चुकी है जिनके शीर्षक हैं: कृपया हसन्तु, संस्कृते एक पञ्चाशत् कथाः, विक्षेपस्य प्रतीक्षा। एक अन्य पुस्तक प्रकशित होने की तैयारी में है संस्कृते १०१ कथाः। इस तरह की और बहुत सी पुस्तकें प्रकाशित करने का हमारा लक्ष्य है ताकि संस्कृत को वर्तमान सन्दर्भ में सृजनात्मक प्रारूप में लोगों के सामने प्रस्तुत किया जा सके।